एक दरख्त|दरख्त|अमि'अज़ीम'|गज़ल|amitesh jain|ajim|darkht|ami'ajim'|ek darkht

एक दरख्त, ये ब्लोग है मेरी गज़लो का जिसके जरीये मैं आप तक अपनी गज़ले पहुचाना चाहता हुँ, उम्मीद करता हुँ, आप सभी इसे पसंद करेगें................

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Tuesday, November 22, 2011

आँखों से रस घोलें हैं हमरे कान्हा......


Posted by Unknown at 12:47:00 AM 10 comments:
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Labels: अमितेष, चोलें, बछिया, हमरे कान्हा
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  • आँखों से रस घोलें हैं हमरे कान्हा......
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  • खुली आंखों से भी उसे सब ख्वाब लगता हैं...
  • अज़नबी अंज़ुमन से बन के रहे....
  • कुछ बिजलियाँ सीधी दिवाने में लगी है........
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