Sunday, April 03, 2011

खुली आंखों से भी उसे सब ख्वाब लगता हैं...


12 comments:

  1. गज़ब की गज़ल कही है…………दिल मे उतर गयी।

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  2. बेहतरीन पेशकश.....जि‍सके माथे पर....वाह, लाजवाब...

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  3. nice its very deep thinking

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  4. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
    कल (4-4-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
    देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
    अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

    http://charchamanch.blogspot.com/

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  5. तुम पहलु में हो मगर मुझे अब तक यक़ीं नहीं,
    कभी-कभी हक़ीक़त भी कितना ख़्वाब लगता है.

    एक बहुत बेहतरीन ग़ज़ल के लिए मुबारकबाद अमितेश जी.

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  6. dil me utar jaane wali behtareen gazal....bahut hi badhiya....keep it up

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  7. wah yaar kya baat hai dil ko chu gaye ye gazal.........i m proude of u dear......teri tarif me aaj kya kah du samaj nahi aa raha..........
    'अमि' तुझे देख कर ये ख्याल आता है
    अब दिल खुद को तेरी गज़लों में पता है

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  8. बहुत खूब..दिल को छूनेवाली गज़ल..आम आदमी के दर्द का बहुत सटीक मर्मस्पर्शी चित्रण..

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  9. bahut sundar....kya khoob farmaya hai janab 1 insaan ki sanjindi ko....

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